दून मेडिकल कॉलेज रैगिंग मामले में जांच में हुआ बड़ा खुलासा, शिकायत संदिग्ध

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देहरादून: दून मेडिकल महाविद्यालय में रैगिंग की कथित शिकायत के संबंध में प्राचार्य डॉ. गीता जैन ने स्पष्ट किया है कि प्राप्त एनोनिमस शिकायत की गंभीरता को देखते हुए तत्काल संस्थान स्तर पर जांच प्रारंभ की गई। प्रारंभिक जांच में उपलब्ध तथ्यों, साक्ष्यों एवं एमबीबीएस विद्यार्थियों के बयानों के आधार पर यह प्रतीत हुआ कि शिकायत प्रथम दृष्टया तथ्यात्मक रूप से पुष्ट नहीं है तथा फर्जी हो सकती है।
प्राचार्य ने बताया कि संस्थान में रैगिंग के विरुद्ध शून्य सहिष्णुता (Zero Tolerance) की नीति अपनाई गई है तथा प्रत्येक शिकायत को अत्यंत गंभीरता से लिया जाता है। इसी क्रम में एंटी-रैगिंग कमेटी एवं संबंधित प्रकोष्ठ द्वारा विस्तृत जांच की गई, जिसमें यह पाया गया कि महाविद्यालय में किसी भी प्रकार की रैगिंग की घटना घटित नहीं हुई है।
उन्होंने कहा कि किसी भी प्रकार की गलत या भ्रामक शिकायत न केवल संस्थान के शैक्षणिक वातावरण को प्रभावित करती है, बल्कि निर्दोष विद्यार्थियों की छवि को भी नुकसान पहुंचा सकती है।
प्राचार्य ने आगे कहा कि दून अस्पताल, देहरादून शहर की जीवनरेखा है, जहां पश्चिमी उत्तर प्रदेश एवं पर्वतीय क्षेत्रों से दूर-दूर से मरीज उपचार हेतु आते हैं। कुछ नकारात्मक तत्वों द्वारा मीडिया को माध्यम बनाकर दून मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल के विरुद्ध दुष्प्रचार (smear campaign) चलाया जा रहा है तथा रैगिंग की कथित फर्जी, अज्ञात शिकायत को बढ़ा-चढ़ाकर प्रस्तुत करना भी उसी कड़ी का हिस्सा प्रतीत होता है।
जांच के दौरान एमबीबीएस प्रथम वर्ष के छात्रों ने भी इस शिकायत को असत्य बताया है और यह इंगित किया कि शिकायत में छात्रों के बजाय फैकल्टी एवं पीजी चिकित्सकों के संदर्भ में ‘दाढ़ी-बाल’ जैसी बातों बातों पर डाँटने का उल्लेख किया गया है, जबकि सामान्यतः जहाँ रैगिंग पाई जाती है वहाँ रैगिंग के मामलों में एक दो वर्ष बड़े वरिष्ठ छात्र ही संलिप्त पाए जाते हैं, जिससे शिकायत की प्रकृति संदिग्ध प्रतीत होती है।
प्राचार्य ने कहा कि ऐसा प्रतीत होता है कि अस्पताल के चिकित्सकों को मीडिया के माध्यम से अनावश्यक रूप से व्यस्त करने का प्रयास किया जा रहा है, जिससे गरीब मरीजों के उपचार एवं छात्रों की पढ़ाई-प्रशिक्षण में बाधा उत्पन्न हो सकती है, क्योंकि इस प्रकार की भ्रामक खबरों की जांच और स्पष्टीकरण में बहुमूल्य समय व्यय होता है।
उन्होंने अंत में आश्वस्त किया कि दून अस्पताल एवं मेडिकल कॉलेज के चिकित्सक एकजुट होकर मरीजों के उपचार एवं विद्यार्थियों के प्रशिक्षण का कार्य सर्वोत्तम रूप से कर रहे हैं और आगे भी करते रहेंगे, तथा फर्जी शिकायतों एवं तथ्यहीन खबरों के माध्यम से नकारात्मकता फैलाने वाले तत्वों को समाज स्वयं ही समय पर दुरुस्त कर देगा।


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