CBSE New Syllabus 2026-27: दिल्ली: केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) ने स्कूली शिक्षा की संरचना में क्रांतिकारी बदलाव की घोषणा की है. राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 और नेशनल करिकुलम फ्रेमवर्क (NCF) 2023 के सुझावों को अपनाते हुए बोर्ड सत्र 2026-27 से नया पाठ्यक्रम लागू करने जा रहा है. इसका सबसे बड़ा असर कक्षा 6 और कक्षा 9 के छात्रों पर पड़ेगा.
- तीन-भाषा फॉर्मूला
सत्र 2026-27 से कक्षा 6 के छात्रों के लिए तीन भाषाओं का अध्ययन अनिवार्य होगा. इसमें सबसे महत्वपूर्ण शर्त यह है कि इन तीन में से कम से कम दो भाषाएं भारतीय मूल की होनी चाहिए. इसका उद्देश्य बहुभाषी शिक्षा को बढ़ावा देना और छात्रों को अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ना है. - बोर्ड परीक्षाओं पर प्रभाव
यह व्यवस्था चरणबद्ध तरीके से लागू होगी. वर्तमान में कक्षा 6 में शुरू होने वाला यह बदलाव 2031 की बोर्ड परीक्षाओं में पूरी तरह दिखाई देगा, जब इस बैच के छात्रों को तीनों भाषाओं में परीक्षा उत्तीर्ण करनी होगी. - गणित और विज्ञान में दो स्तर
कक्षा 9 के लिए गणित और विज्ञान जैसे विषयों में अब छात्रों को अपनी रुचि और क्षमता के अनुसार चुनाव करने का मौका मिलेगा. इसमें दो स्तर होंगे:
स्टैंडर्ड: यह अनिवार्य होगा और 80 अंकों का सामान्य पेपर होगा.
एडवांस्ड: जो छात्र विषय में गहरी समझ और उच्च दक्षता चाहते हैं, वे 25 अंकों का अतिरिक्त ‘एडवांस्ड’ पेपर चुन सकेंगे.
- अंक पत्र में बदलाव
एडवांस्ड पेपर के अंक मुख्य प्रतिशत में नहीं जुड़ेंगे. हालांकि, यदि कोई छात्र इसमें 50% या उससे अधिक अंक लाता है, तो उसकी इस उपलब्धि को मार्कशीट पर अलग से दर्शाया जाएगा, जो भविष्य में उच्च शिक्षा के लिए फायदेमंद हो सकता है. - कंप्यूटर और AI की पढ़ाई
तकनीकी युग को देखते हुए ‘कंप्यूटेशनल थिंकिंग’ और ‘आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस’ (AI) को कक्षा 9 और 10 के लिए अनिवार्य विषय बना दिया गया है. 2029 में पहली बार कक्षा 10 के छात्रों को इन विषयों के लिए अनिवार्य बोर्ड परीक्षा देनी होगी. - कौशल विकास और कला शिक्षा
नया पाठ्यक्रम केवल किताबी ज्ञान तक सीमित नहीं है. अब कक्षा 9 और 10 में आर्ट एजुकेशन, फिजिकल एजुकेशन और वोकेशनल एजुकेशन (व्यावसायिक शिक्षा) को अनिवार्य कर दिया गया है. सत्र 2027-28 से वोकेशनल एजुकेशन के लिए बोर्ड परीक्षा भी आयोजित की जाएगी. - विदेशी छात्रों को राहत
विदेशी स्कूलों से लौटने वाले छात्रों के लिए भाषा के नियमों में कुछ लचीलापन रखा गया है. यदि उनके पिछले स्कूल में तीसरी भाषा उपलब्ध नहीं थी, तो उन्हें विशेष परिस्थितियों में छूट मिल सकती है, बशर्ते वे विषयों की कुल संख्या पूरी करें.
CBSE का यह कदम रटकर सीखने की प्रवृत्ति को खत्म करने और छात्रों के सर्वांगीण विकास की ओर एक बड़ा प्रयास है. दो स्तर के विषयों से छात्रों पर परीक्षा का तनाव कम होगा और वे अपनी पसंद के अनुसार विशेषज्ञता हासिल कर सकेंगे.