Dehradun News: बिंदाल नदी के किनारे से हटाया जाएगा अतिक्रमण, सर्वे कर लगाए गए लाल निशान

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रिस्पना-बिंदाल नदी पर बनेगी फोरलेन एलिवेटेड रोड, जानें कबसे शुरू होगा काम

Dehradun News: देहरादून शहर पर बढ़ते यातायात दबाव के मददेनजर शहर के बीचोंबीच स्थित रिस्पना और बिंदाल नदियों पर 6000 करोड़ रुपये की लागत से फोरलेन एलिवेटेड रोड बनाने की तैयारी शुरू हो चुकी है. इसके लिए रिस्पना और बिंदाल के किनारे स्थित सैकड़ों घरों को विस्थापित करने के लिए प्लान पर काम हो रहा है। तो वहीं रिस्पना के बाद अब बिंदाल नदी के किनारे बसे घरों पर भी लाल निशान लगने शुरू हो गए है। साथ ही क्षेत्र में सर्वे का काम भी जारी है। जिससे इन अवैध निर्माण को हटाया जा सके।

चार टीमें कर रही ग्राउंड सर्वे, देखे जा रहे ये दस्तावेज

देहरादून में रिस्पना नदी के बाद अब बिंदाल नदी के किनारे 2016 के बाद हुए अवैध निर्माण को हित करने का काम शुरू हो गया है। धामी सरकार ने ग्राउंड सर्वे कर रिपोर्ट सौंपने की जिम्मेदारी निगम को सौंपी है।इसके लिए चार टीमें गठित की गई हैं। इनमें संबंधित विभागों के अधिकारी कर्मचारी शामिल हैं। उप. नगर आयुक्त गोपाल राम बिनवाल इस कार्य की मॉनीटरिंग कर रहे है। जिसके तहत बुधवार को गोविंदगढ़ में बिंदाल नदी किनारे घरों का सर्वे किया गया। क्षेत्रवासियों के पानी और बिजली के बिल चेक किए गए।

अतिक्रमण चिन्हित कर रिपोर्ट सौंपने के आदेश

इन टीमों में जल संस्थान, सिंचाई विभाग, राजस्व, नगर निगम और एमडीडीए के अधिकारी व कर्मचारी शामिल हैं। टीमों के द्वारा यह चेक किया जा रहा है कि निर्धारित तिथि के दौरान बिंदाल नदी की चौड़ाई कितनी थी। यह खसरा नंबर के हिसाब से अलग-अलग होगी। ऐसे में यदि किसी ने नदी क्षेत्र में अवैध निर्माण किया होगा तो उसे निशानदेही कर चिन्हित किया जा रहा है। पटेलनगर, तिलकनगर, बिंदाल पुल समेत अन्य इलाकों में अतिक्रमण चिन्हित किया गया। यह प्रक्रिया आगे भी जारी रहेगी। कोर्ट के आदेश के क्रम में सरकार ने रिस्पना नदी के बाद अब बिंदाल नदी किनारे अवैध निर्माण, अतिक्रमण चिन्हित कर रिपोर्ट सौंपने के आदेश दिए हैं। इसके बाद आगे की कार्रवाई होगी।

वहीं दूसरी ओर सरकार की रिस्पना नदी पर रिस्पना पुल से नांगल पुल तक 25 करोड़ की लागत से 11 किलोमीटर और बिंदाल नदी पर कारगी चौक से सांई मंदिर तक 3500 करोड़ रुपये की लागत से 15 किलोमीटर लंबा एलिवेटेड कॉरीडोर बनाने की योजना है। जिससे शहर के बाहर ही बाहर ट्रेफिक को डायवर्ट किया जा सकेगा. इसके लिए जमीन अधिग्रहण से लेकर सभी जरूरी सर्वे पूरे किए जा चुके हैं. सरकार की कोशिश है कि इसी साल से दोनों कॉरीडोर का निर्माण कार्य शुरू कर दिया जाए.

दोनों कॉरीडोर बनाने के लिए प्रभावित लोगों और जमीनों का निरीक्षण किया जा चुका है. बिंदाल नदी पर करीब दो हजार पेड़ भी इसके लिए काटे जाने हैं. प्रशासन के आगे सबसे बड़ी समस्या है इसकी जद में आने वाले भवनों, लोगों का विस्थापन. इसके लिए बिंदाल और रिस्पना नदी के किनारे बसे सैकडों भवन इसकी चपेट में आ रहे हैं.

तीन साल में प्रोजेक्ट पूरा करने के निर्देश

दरअसल, जल्द ही दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे चालू होने वाला है. इससे देहरादून शहर पर ट्रेफिक दबाव लगभग दुगना होने का अनुमान है. ऐसे में रिस्पना और बिंदाल नदियों पर बनने वाला एलिवेटेड कॉरीडोर शहर को ट्रेफिक दबाव से बचाने में बड़ी भूमिका निभा सकता है. मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने अगले तीन साल में इस प्रोजेक्ट को पूरा करने के निर्देश जारी किए हैं.

किस रफ्तार से चलेगे बिंदाल-रिस्पना एलिवेटेड कॉरिडोर पर वाहन

रिस्पना एलिवेटेड कॉरिडोर 11 किलोमीटर होगा. कॉरिडोर को मसूरी तक ले जाने का सुझाव है. बिंदाल एलिवेटेड कॉरिडोर कारगी चौक से शुरू होकर राजपुर रोड पर साईं मंदिर के पास समाप्त होगा. डीपीआर को पूरा करने में करीब 9 माह का समय लगेगा. 60 किलोमीटर प्रतिघंटा की रफ्तार से इस कॉरिडोर में वाहन चल सकेंगे.

लोक निर्माण विभाग सचिव पंकज कुमार पांडेय ने बताया, ‘देहरादून शहर को जाम के झाम से निजात दिलाने के लिए शहर के बीचोंबीच स्थित रिस्पना और बिंदाल नदियों पर 6000 करोड़ रुपये की लागत से फोरलेन एलिवेटेड रोड बनाया जाएगा. भूमि अधिग्रहण का काम शुरू हो चुका है. फॉरेस्ट लैंड ट्रांसफर का काम शुरू कर दिया गया है. फाइनिंस कैसे होगी, इस पर भी वर्क आउट किया जा रहा है.’


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