जन्नतुल बक़ी के पुनर्निर्माण के लिए लखनऊ में जोरदार विरोध प्रदर्शन, PM मोदी को भेजा गया पत्र

Spread the love

सऊदी हुकूमत के खिलाफ एकजुट हुए लोग, आले सऊद मुर्दाबाद के लगे नारे, जानें वजह

लखनऊः जन्नतुल बक़ी की तामीर के लिए दुनिया भर में आवाज़ उठायी जा रही है और आले सऊद शासन के खिलाफ विरोध प्रदर्शन ,सेमिनार हो रहे हैं। इसी कड़ी में लखनऊ में सोमवार को शिया समुदाय ने शहीद स्मारक पर सऊदी हुकूमत के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया। इस प्रदर्शन का नेतृत्व शिया धर्मगुरु मौलाना यासूब अब्बास ने किया, जिसमें समुदाय के कई सदस्य शामिल हुए।

बता दें कि सऊदी अरब के खिलाफ भारता का शिया समुदाय आग बबूला हो गया है और जमकर विरोध प्रदर्शन कर रहा है। वजह जानकर सारी दुनिया हैरान है। आप भी जानकर हैरान हो जाएंगे। लखनऊ में चूंकि बहुत बड़ी तादाद में शिया समुदाय रहता है। इसलिए यहां पर भी शहीद स्मारक पर शांतिपूर्ण प्रदर्शन हुआ। जिसमें काले कपड़े और काली पट्टी पहनकर विरोध जताय गया और जन्नतुल बकी के पुनर्निर्माण की उठाई मांग उठाई गई।

पूरा मामला अब से करीब सौ साल पहले हुई घटना से जुड़ा है जब 1925 में सऊदी किंग आले सऊद ने मदीना में मौजूद जन्नतुल बकी कब्रिस्तान तुड़वा दिया था। इस कब्रिस्तान में रसूल-ए-इस्लाम की बेटी और दूसरे इमामों की कब्रें थीं। शिया समुदाय सऊदी अरब में तुड़वाई गई मजारों को दोबारा बनाने की मांग करता रहा है और इसके लिए हर साल शिया मुसलमान सऊदी सरकार के खिलाफ प्रदर्शन करते हैं। इसी कड़ी में आज भी प्रदर्शन हुआ।

प्रदर्शन के दौरान शिया धर्मगुरु मौलाना यासूब अब्बास ने बताया कि सऊदी अरब के मदीना में करीब सौ साल पहले इस्लाम विरोधी कार्य किया गया था। पैगम्बर मोहम्मद साहब की बेटी बीबी फातेमा जहरा स.अ. और चार इमामों की मजार को 100 वर्ष पूर्व सऊदी हुकूमत ने ध्वस्त कर दिया था। जिसको लेकर शिया समुदाय में पीढ़ी दर पीढ़ी नाराजगी चली आ रही है। इसके पुनः निर्माण की मांग को लेकर हर साल पूरे देश में विरोध प्रदर्शन किए जाते हैं।

ये भी पढ़ेंः पाकिस्तान में शिया मुसलमानों की हत्या की निंदा, मौलाना यासूब अब्बास साहब ने उठाई आवाज

उन्होंने कहा कि प्रदर्शन के माध्यम से ये मांग की जाती है कि भारत सरकार सऊदी हुकूमत पर दबाव बनाकर जन्नत उल बकी कब्रिस्तान का पुनः निर्माण करवाये। इन विरोध प्रदर्शनों और पुनर्निर्माण के आह्वान के बावजूद, सऊदी सरकार ने कब्रों और मकबरों के जीर्णोद्धार के किसी भी अनुरोध को अस्वीकार कर दिया है। कब्रिस्तान अभी भी अपनी वर्तमान स्थिति में है, वहाँ पहले से मौजूद कब्रें और मकबरे नहीं हैं। इस प्रदर्शन में मुख्य रूप से शामिल होने वालों में ऑल इंडिया शिया पर्सनल लॉ बोर्ड के अध्यक्ष मौलाना साएम मेहंदी नक़वी, मौलाना जाफ़र अब्बास समेत बड़ी संख्या में धार्मिक एवं समाजी संस्थाएं और मातमी अंजुमनें भी शामिल रही।

प्रदर्शन का कारण: शिया समुदाय की मुख्य मांग जन्नतुल बकी कब्रिस्तान में स्थित हजरत फातिमा और अन्य इमामों के रौज़ों के पुनर्निर्माण की है, जिन्हें सऊदी सरकार ने 1925-1926 में ध्वस्त कर दिया था। समुदाय का मानना है कि इन पवित्र स्थलों का पुनर्निर्माण उनकी धार्मिक भावनाओं का सम्मान करेगा। ​

प्रधानमंत्री से अपील: मौलाना यासूब अब्बास ने भारत के प्रधानमंत्री से अपील की है कि वे सऊदी सरकार पर दबाव डालें ताकि जन्नतुल बकी में रौज़ों का पुनर्निर्माण किया जा सके। उन्होंने कहा कि भारत और सऊदी अरब के अच्छे संबंधों का उपयोग इस मुद्दे को हल करने में किया जाना चाहिए। ​

शांतिपूर्ण प्रदर्शन: शिया समुदाय ने शांतिपूर्ण तरीके से प्रदर्शन किया, जिसमें महिलाओं और बच्चों सहित बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए। उन्होंने काली पट्टियाँ बांधकर और तख्तियाँ लेकर अपनी मांगों को प्रस्तुत किया।

आगे की योजना: समुदाय ने घोषणा की है कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होतीं, वे शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक तरीकों से अपने विरोध प्रदर्शन जारी रखेंगे। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से भी इस मुद्दे पर ध्यान देने की अपील की है।


Spread the love

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *